| ॐ |
| भूर्भुवः स्वः |
| त्सवितुर्वरेण्यं |
| भर्गो देवस्य धीमहि |
| धियो योनः प्रचोदयात्। |
---यजुर्वेद ३६.३ |
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अर्थः- १ सूरःफ़ातिह़ः ५
शुरु खुदा का नाम लेकर, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
सब तरह की तारीफ खुदा के लिए ही है जो तमाम मख़्लुकात का परवरदिगार है।
बड़ा मेहरबान, निहायत रहमवाला, इन्साफ के दिन का हाकिम-ऐ परवरदिगार हम तेरी हि इबादत करते हैं, और तुझी से मदद मांगते हैं। हमको सीधे रास्ते पर चला, उन लोगों का रास्ता जिनपर तु अपना फ़ज़्ल व करम करता रहा, न उनपर जिनपर गुस्सा होता रहा और न गुमराहों का।
'Our Father in heaven, may your name be kept holy. Let your Kingdom come. Let your will be done, as in heaven, so on earth. Give us today our daily bread. Forgive us our debts, as we also forgive our debtors. Bring us not into temptation, but deliver us from the evil one. For yours is the Kingdom, the power, and the glory forever. Amen.'
---- Holy Bible
संसार के सारे धर्म एक ही सत्य (ईश्वर, अल्लाह, गॉड, वाहे गुरु) की प्रार्थना अपनी-अपनी भषाओं मे करते हैं। लेकिन हमारी नादानी देखिए कि चन्द पाखण्डी धर्म - गुरुओं के चंगुल मे फंसकर हम आपस मे लड़ते-झगड़ते रहते हैं। कुछ गिने-चुने लोग इस सत्य को जानते भी हैं तो बोलने और करने का साहस नहीं है। "जीवन पथ" इस सच्चाई को साहस के साथ समाज के सामने रखते हुए "जीवन जीने की कला" सिखाने के लिए प्रतिबध्द है।